विशालकाय प्रदर्शनियों के माध्यम से वनों, जलस्रोतों, जलवायु परिवर्तन एवं प्रदूषण नियंत्रण पर जनसामान्य व विद्यार्थियों को दृश्य-श्रव्य रूप में जागरूक करना।
पर्यावरण जागरूकता के लिये लोककला, लोकगीतों व नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में सहज संप्रेषण कार्यक्रम।
टेलीस्कोप द्वारा चंद्रमा के क्रेटर, ग्रहों (बृहस्पति, शनि आदि) का रात्रि दर्शन और अंतरिक्ष विज्ञान पर बच्चों में उत्साह व जिज्ञासा पैदा करना।
पारंपरिक कठपुतली कला के जीवंत पात्रों द्वारा अंधविश्वास निवारण, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं वैज्ञानिक तथ्यों को मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत करना।
आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ढोंगी तांत्रिकों द्वारा दिखाए जाने वाले कथित 'चमत्कारों' के पीछे छिपे रसायन एवं भौतिक विज्ञान का प्रत्यक्ष प्रदर्शन।
बेकार व सस्ती घरेलू सामग्रियों से विज्ञान के गूढ़ सिद्धांतों को समझाने वाले वर्किंग मॉडल्स और हैंड्स-ऑन एक्टिविटी वर्कशॉप।
जंगल, नदी तटों व प्राकृतिक अभयारण्यों में विद्यार्थियों के साथ शैक्षणिक भ्रमण, पौधों, पक्षियों व कीटों की पहचान और पर्यावरण संवाद।
विषैले व विषहीन सांपों की पहचान, सर्पदंश पर प्राथमिक उपचार, झाड़-फूंक के घातक अंधविश्वास से बचाव और सर्प संरक्षण की वैज्ञानिक जानकारी।
दूध, घी, मसालों, दालों और तेल में मिलावट को घरेलू स्तर पर आसानी से परखने की सरल रासायनिक विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण।
स्कूली बच्चों को वैज्ञानिक संकल्पनाओं पर आधारित कार्यशील मॉडल (रोबोटिक्स, सोलर एनर्जी, हाइड्रॉलिक्स) बनाने का गहन प्रशिक्षण।
देश के शीर्ष वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं से आदिवासी और ग्रामीण बच्चों का सीधा साक्षात्कार व प्रश्नोत्तरी, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।
हायर सेकंडरी एवं कॉलेज स्तर के विद्यार्थियों को विज्ञान, तकनीकी, अंतरिक्ष एवं पर्यावरण शोध में करियर के अवसरों की जानकारी।
चुनाव आयोग व प्रशासन के सहयोग से कम मतदान प्रतिशत वाले चिन्हित मतदान केंद्रों पर विशेष मतदाता जागरूकता रैलियां व सांस्कृतिक कार्यक्रम।
आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी व ग्रामीण स्कूलों के शिक्षकों को नवाचारी शिक्षण तकनीकों एवं प्रयोग आधारित विज्ञान सिखाने का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण।
मध्य प्रदेश के 89 आदिवासी विकासखंडों के हाट-बाजारों व चौराहों पर युवाओं व कलाकारों द्वारा ऊर्जावान पर्यावरण जागरूकता फ्लैश मॉब।
पचमढ़ी, मढ़ई, भेड़ाघाट आदि पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों व स्थानीय निवासियों को प्लास्टिक मुक्ति एवं पर्यावरण शुचिता के प्रति जागरूक करना।
डॉ. सी.वी. रमन, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, सर जगदीश चंद्र बोस आदि की जयंतियों पर राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एवं विशेष संगोष्ठियों का आयोजन।
प्रतिवर्ष 5 जून को सघन पौधरोपण, जल संरक्षण शपथ, चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा जनजागरण रैलियों का वृहद स्तर पर संचालन।
सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, उल्कावृष्टि, भूकंप व जलवायु घटनाओं पर वैज्ञानिक आलेखों, प्रेस वार्ताओं व टीवी/रेडियो के जरिए सही तथ्य प्रस्तुत करना।
व्हाट्सएप, डिजिटल चैनलों के माध्यम से युवाओं और जनसाधारण तक प्रतिदिन विज्ञान के रोचक तथ्य और पर्यावरण संदेश पहुंचाना।